गुर्जर-प्रतिहार कालीन माता का मंदिर जो करता हे मनोकामना पूर्ण

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pawaimata
#पावई वाली माता मंदिर

अटेर क्षेत्र के पावई गांव में मौजूद मां भगवती के मंदिर आसपास गांव के लोगों के अलावा दूर-दराज क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है, हर रोज मातारानी के दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ रहा है। गौरतलब है कि पावई वाली माता के दरबार में नवरात्र में आसपास से काफी श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में भी घट स्थापना के साथ देवी की रोजाना विशेष पूजा अर्चना मंदिर के पुजारियों के द्वारा की जाती हे पूर्व विधायक श्री हेमंत कटारे भी इस मंदिर पर आते हैं और आस पास में सबसे लोकप्रिय भी हे माता का स्थान 

डाकू भी आते थे दर्शन के लिए 

जब चंबल क्षेत्र में डकैतों का बोलवाला था। उस दौरान नवरात्र पर चंबल के कई नामी डकैत मातारानी के दरबार में दर्शन के लिए रात के समय आकर घंटे चढ़ाते थे। उनके चढ़े हुए घंटे आ भी पेड़ों पर लटके हुए हैं। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार कई डकैत मां भगवती को अपनी आराध्य मानते थे। जिनमे मोहर सिंह गुर्जर ,निर्भय गुर्जर ,मलखान ,दयाराम राम बाबू गडरिया आदि नामी डकैत इधर आते थे 

एक हजार वर्ष पुराना है मंदिर 
जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर पावई माता मंदिर का इतिहास करीब एक हजार वर्ष पुराना है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में गुर्जर-प्रतिहार राजाओं के अंतिम वंशजों का हे जिन्होंने इधर राज किया था, वहीं भक्त माता को देवी करौली की छोटी बहन के रूप में पूजते हैं। कहा जाता है कि माता कैलादेवी के दर्शन के बाद अगर पावई वाली मातारानी के दर्शन नहीं किए तो संबंधित श्रद्धालुओं की यात्रा अधूरी मानी जाती है

होती हैं पूर्ण मनोकामना 

पावई वाली माता मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि मातारानी के दर्शन माता से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। वहीं नवरात्र में यहां पर जवारे और नेजा चढ़ाने से लोगों की सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। इस परम्परा के चलते आस पास में इस स्थान के लिए  काफी ज्यादा आस्था हे जिसको लोग मानते हैं और पूजते हैं 

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